सूरज, रोशनी में आ गई है कमी,बैज्ञानिक खौफ में

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क्या सूरज कमजोर हो गया है. उसकी रोशनी कम हो चुकी है. कुछ साइंटिस्ट ऐसा ही कह रहे हैं. उनका मानना है कि धरती को सबसे ज्यादा उर्जा देने वाला सूरज कम चमक रहा है. उसकी रोशनी मद्धम हुई है.सूरज आकाशगंगा में मौजूद उसके जैसे अन्य तारों की तुलना में कमजोर पड़ गया है.

दरअसल वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले 9000 सालों से सूरज लगातार कमजोर होता जा रहा है. इसी के चलते इसकी चमक भी कम हो रही है. जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने दावा किया है.

क्या है इसकी वजह
वैज्ञानिकों ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के केपलर स्पेस टेलीस्कोप से मिले आकंड़ों के अध्ययन के आधार पर ये बात कही है. बकौल उनके, हमारे आकाशगंगा में मौजूद सूरज जैसे अन्य तारों की तुलना में अपने सूरज की धमक और चमक फीकी पड़ रही है.

मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक डॉ. एलेक्जेंडर शापिरो के अनुसार, वो लोग सूरज के कमजोर होने के निष्कर्ष पर आकाशगंगा में सूरज जैसे 2500 तारों से तुलना के बाद पहुंचे हैं.

सोलर स्पाट्स कम हुए हैं
सूरज पिछले कुछ हजार साल से शांत है. सूर्य की सतह पर बनने वाले सोलर स्पॉट की संख्या में भी कमी आई है. सन 1610 के बाद से लगातार सूर्य पर बनने वाले सोलर स्पॉट कम हुए हैं. अभी पिछले साल ही करीब 264 दिनों तक सूरज में एक भी स्पॉट बनते नहीं देखा गया था.

सोलर स्पॉट तब बनते हैं जब सूरज के केंद्र से गर्मी की तेज लहर ऊपर उठती है. इससे बड़ा विस्फोट होता है. अंतरिक्ष में सौर तूफान उठता है. माना जाता है सूरज 4.6 बिलियन साल पुराना है. इस तुलना में 9000 साल कुछ भी नहीं है.

कैसे पैदा होती है सूर्य मे ऊर्जा
सूरज मुख्य तौर पर हाइड्रोजन और हीलियम गैसों का एक विशाल गोला है. इनके परमाणु विखंडन से सूर्य अपने केंद्र में अपार ऊर्जा पैदा करता है. हालांकि सूर्य से निकली ऊर्जा का छोटा सा भाग ही पृथ्वी पर पहुंचता है. इसका 15 फीसदी हिस्सा अंतरिक्ष में ही इधर-उधर छिटक जाता है.

पृथ्वी से कितनी दूर है
सूर्य से पृथ्वी की औसत दूरी लगभग 14,96,00,000 किलोमीटर या 9,29,60,000 मील है. सूरज से धरती तक प्रकाश को आने में 8.3 मिनट का समय लगता है. जिस प्रकार पृथ्वी और अन्य ग्रह सूरज की परिक्रमा करते हैं. उसी तरह सूरज भी आकाश गंगा के केन्द्र की परिक्रमा करता है. उसको ये परिक्रमा करनें में 22 से 25 करोड़ वर्ष लगते हैं, इसे एक निहारिका वर्ष भी कहते हैं.

Source-News18Hindi

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